श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, शांत व विश्वासपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यात्रा मार्ग की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी ऑडिट शुरू किया है। इसी आकलन के आधार पर यात्रा का सुरक्षा कवच तैयार किया जाएगा।
हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के लिए दर्शन के लिए आते हैं। वर्ष 1990 के बाद से लगातार आतंकियों के निशाने पर रही इस महत्वपूर्ण यात्रा पर 36 छोटे-बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं। समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्री अमेरश्वर धाम में ही भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी और इसलिए इसे श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा पुकारा जाता है।
आगामी तीन जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा अगस्त में रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। पहले की तरह पारंपरिक बालटाल और पहलगाम रूट से यात्रा पवित्र गुफा तक पहुंचेगी और वापसी करेगी। सूत्रों ने बताया कि सिक्योरिटी ऑडिट के आधार पर यात्रा मार्ग पर सुरक्षाबलों की तैनाती, जांच चौकियां और श्रद्धालुओं के आवागमन का समय और यात्री शिविरों की सुरक्षा को तय किया जाता है।
दक्षिण कश्मीर में जिला अनंतनाग और पहलगाम पवित्र गुफा मार्ग तक और सेंट्रल कश्मीर में जिला गांदरबल व बालटाल पवित्र गुफा तक के संबंधित क्षेत्र और यात्रा मार्ग का सुरक्षा आकलन संबंधित जिला पुलिस प्रमुखों की निगरानी में जारी है।
दोनों पारंपरिक मार्गों पर पवित्र गुफा तक श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा, ट्रैफिक योजना, सुरक्षाबलों की तैनाती, आपात प्रतिक्रिया प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय योजना का रोडमैप ऑडिट के आधार पर तय होगा। इसे अगले कुछ दिनों में अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि यात्रा के सुरक्षा कवच के लिए प्रारंभिक अनुमान के आधार पर पुलिस, सेना और केंद्रीय अर्ध सैन्यबलों के लगभग 42 हजार जवानों और अधिकारियों को तैनात किए जाने का प्रस्ताव है। यात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं के शिविरों की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र रहेगा। इसके अलावा सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए संबंधित इलाकों की निगरानी की जाएगी।

